सरस्वती के ‘पुजारी’ को लक्ष्मी का ‘लालच’

उत्तराखंड के दुर्गम क्षेत्रों में जाने से बच रहे शिक्षकों को प्रोत्साहन भत्ता देने की तैयार चल रही है। पर्वतीय जनपदों में अध्यापक स्थानांतरण से बेहतर निलंबन मान रहे हैं, जिससे विभाग की चिंताएं बढ़ गई हैं कि आखिर मास्टरों को कैसे भेजा जाए।

विद्यालयी शिक्षामंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने मंगलवार को विभागीय समीक्षा के दौरान विभागीय सचिव को प्रोत्साहन भत्ता देना का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। जिन स्कूलों में छात्रों की संख्या 50 रहेगी एक शिक्षक की तैनाती होगी।

प्रोत्साहन भत्ता
शिक्षा मंत्री ने सीमांत क्षेत्रों में अध्यापकों के कार्य भार ग्रहण न करने पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि हमें ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि प्रदेश में सभी विद्यालयों में शिक्षक उपलब्ध रहें। मंत्री ने इसके लिए प्रोत्साहन भत्ता देने का विकल्प सुझाते हुए विभागीय सचिव को प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिससे आकर्षित होकर पर्वतीय क्षेत्रों में अध्यापकों की कमी दूर की जा सकेगी।

पारदर्शिता बरतने की हिदायत
मंत्री ने स्कूलों के उच्चीकरण की पूर्व में हुई घोषणा के तहत विद्यालयों में जल्द पदों के सृजन की कार्यवाही पूरी करने के निर्देश जारी किये हैं। भोजन माताओं की समस्याओं के साथ सीआरसी/बीआरसी में नियुक्तियों पर पारदर्शिता बरतने की हिदायत मंत्री ने दी है।

जल्द पूरा करने के निर्देश
शिक्षा मंत्री ने शिक्षामित्रों व शिक्षा आचार्यों को दोबारा रखने का प्रस्ताव तथा इसके साथ-साथ� स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षकों की नियुक्ति के लिए मान दंड निर्धारित करने के लिए सुझाव मांगे हैं।

इससे पहले पेयजल मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने विभाग में मुख्यमंत्री की 94 घोषणाओं से 54 के पूर्ण होने से संबंधित जानकारी ली है। मंत्री ने क्षतिग्रस्त पेयजल योजनाओं के जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में प्रमुख सचिव शिक्षा एसराजू मौजूद रहे।

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